Contents
- 1 RELIANCE में आज 1.6% की तेज़ी — मुख्य बातें
- 2 आज की मूल्य गति का तकनीकी विश्लेषण
- 3 Oil & Gas सेक्टर का व्यापक संदर्भ
- 4 फंडामेंटल और वैल्यूएशन
- 5 हाल की प्रबंधन कार्रवाई और कैटलिस्ट
- 6 FII/DII गतिविधि और संस्थागत निवेशकों का दृष्टिकोण
- 7 आगे की संभावनाएँ — Bull / Base / Bear परिदृश्य
- 8 भारतीय खुदरा निवेशकों के लिए रणनीति
- 9 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 10 भारतीय बाज़ार स्नैपशॉट
- 11 RELIANCE के मुख्य फंडामेंटल (Screener.in)
- 12 आज की मुख्य बाज़ार खबरें
- 13 भारतीय बाज़ार स्नैपशॉट
- 14 RELIANCE के मुख्य फंडामेंटल (Screener.in)
- 15 आज की मुख्य बाज़ार खबरें
RELIANCE में आज 1.6% की तेज़ी — मुख्य बातें
18 अप्रैल 2026 का सत्र भारतीय शेयर बाज़ार के दिग्गज, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ (RELIANCE) के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। ₹1,365.00 पर बंद होने के साथ, स्टॉक ने पिछले बंद ₹1,343.30 से 1.62% की ठोस बढ़त दर्ज की। आज के कारोबारी दिन में 13,869,105 शेयरों का संचयी वॉल्यूम रहा, जो कि पिछले 30 दिनों के औसत वॉल्यूम का लगभग 0.6x है। यह कम वॉल्यूम इस बात का संकेत है कि बाज़ार के बड़े खिलाड़ी अभी भी सतर्क हैं, और आज की बढ़त पूरी तरह से संस्थागत खरीदारी की स्पष्टता के बजाय बाजार की सकारात्मक धारणा का परिणाम है। रिलायंस का वर्तमान मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹18.4 ट्रिलियन के स्तर पर बना हुआ है, जो निफ्टी 50 के सूचकांक को स्थिरता प्रदान करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पिछले 3 वर्षों के डेटा को देखें तो RELIANCE ने ₹1,200 के स्तर से ₹1,450 के बैंड के बीच अपनी यात्रा तय की है, जहाँ हर गिरावट को मजबूत हाथों ने भुनाया है। कंपनी का तिमाही राजस्व ₹2,50,000 करोड़ के पार निकल चुका है, जो इसके बिजनेस मॉडल की विशालता को दर्शाता है। विश्लेषक के दृष्टिकोण से, रिलायंस अब केवल एक ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) इकाई नहीं है; यह एक ऐसा इकोसिस्टम है जिसका EBITDA मार्जिन रिटेल और डिजिटल सर्विसेज की बदौलत 18-20% के बीच बना हुआ है। ₹1,365 का स्तर एक साइकोलॉजिकल बैरियर है। यदि हम पिछले तीन वर्षों के चार्ट को देखें, तो रिलायंस ने अक्सर ₹1,350-₹1,380 के दायरे में कंसोलिडेशन दिखाया है, जिसके बाद एक बड़ा ब्रेकआउट या करेक्शन देखने को मिला है। निवेशकों को यह समझना होगा कि यह स्टॉक भारतीय जीडीपी का प्रॉक्सी (Proxy) है। आने वाली तिमाहियों में, ग्रीन एनर्जी कैपेक्स की रफ़्तार तय करेगी कि क्या यह शेयर अपने सर्वकालिक उच्च स्तरों को फिर से छू पाएगा। कंपनी के पास वर्तमान में लगभग ₹45,000 करोड़ की नकद नकदी (Cash Balance) है जो इसे अगले 12 महीनों में किसी भी बड़े अधिग्रहण के लिए तैयार रखती है।
आज की मूल्य गति का तकनीकी विश्लेषण

तकनीकी चार्ट पर RELIANCE ने आज एक ‘बुलिश मारूबोज़ू’ जैसी कैंडल का निर्माण किया है, जो इंट्राडे बाइंग प्रेशर को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। वर्तमान में 14-दिन का RSI 58 पर स्थित है, जो कि स्ट्रेंथ दिखाता है लेकिन ओवरबॉट ज़ोन (70+) से काफी दूर है, यानी ऊपर की तरफ अभी पर्याप्त जगह है। MACD लाइन सिग्नल लाइन के ऊपर क्रॉसओवर बना रही है, जो कि मिड-टर्म ट्रेडर्स के लिए एक पॉजिटिव संकेत है। बोलिंजर बैंड्स के निचले हिस्से से बाउंस बैक करने के बाद, शेयर ने अब मिड-बैंड को पार कर लिया है, जो एक ‘ट्रेंड रिवर्सल’ की शुरुआत हो सकती है। 50-दिवसीय और 200-दिवसीय मूविंग एवरेज (DMA) के बीच का फैलाव लगातार कम हो रहा है, जो स्टॉक में एक बड़े मूव की आहट है। 200-DMA ₹1,280 के पास एक ‘अभेद्य’ सपोर्ट के रूप में खड़ा है। ₹1,320 का स्तर एक तत्काल सपोर्ट के रूप में कार्य कर रहा है, जबकि ऊपर की ओर ₹1,385 के स्तर पर गहरा रेजिस्टेंस मौजूद है। यदि वॉल्यूम में अचानक उछाल आता है और यह 20-दिन के औसत वॉल्यूम से ऊपर जाता है, तो ₹1,400 का स्तर पार करना महज औपचारिकता होगी। इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए 15-मिनट के चार्ट पर वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) 1,360 के आसपास है, जिसके ऊपर क्लोजिंग देना एक बहुत ही बुलिश सेटअप बनाता है। आरएसआई (RSI) के मोमेंटम और वॉल्यूम की कमी को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि रिलायंस अभी ‘एक्युमुलेशन फेज’ में है, जहाँ बड़े ऑपरेटर धीरे-धीरे माल उठा रहे हैं।
Oil & Gas सेक्टर का व्यापक संदर्भ
Oil & Gas सेक्टर में वैश्विक क्रूड ऑयल की कीमतों का सीधा प्रभाव पड़ता है, लेकिन रिलायंस की अनूठी रणनीति इसे अन्य खिलाड़ियों जैसे ONGC या OIL से अलग करती है। जबकि ONGC मुख्य रूप से कच्चे तेल के अन्वेषण (Exploration) पर निर्भर है, रिलायंस का बिजनेस मॉडल रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स, और रिटेल के बीच बंटा हुआ है। यदि हम सेक्टर रोटेशन को देखें, तो जब भी ग्लोबल रिफाइनिंग मार्जिन्स (GRM) गिरते हैं, रिलायंस का रिटेल और डिजिटल बिजनेस उसे एक सुरक्षित सुरक्षा घेरा प्रदान करता है। तुलनात्मक रूप से, BPCL या IOC जैसे पीएसयू की तुलना में रिलायंस का रिफाइनिंग मार्जिन हमेशा प्रीमियम पर रहा है क्योंकि इनकी क्षमता का पैमाना (Scale) बहुत बड़ा है। भारत के ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) की दिशा में रिलायंस का ग्रीन हाइड्रोजन में निवेश उसे दीर्घकालिक रूप से एक ‘एनर्जी प्लेटफॉर्म’ के रूप में स्थापित करता है। भारतीय रिजर्व बैंक की रेपो दरें (6.5%) रिलायंस के लिए एक बड़ा कारक हैं, क्योंकि उच्च दरें ऋण की लागत (Debt Servicing Cost) को बढ़ाती हैं। इसके बावजूद, कंपनी का debt-to-equity रेशियो 0.35 के स्तर पर बना हुआ है, जो इसके प्रतिस्पर्धियों (जैसे IOC का 0.5+) की तुलना में काफी बेहतर है। रिलायंस की डॉलर-आधारित आय का एक बड़ा हिस्सा इसे INR के अवमूल्यन (Depreciation) के खिलाफ एक स्वाभाविक हेज (Natural Hedge) देता है। सेक्टर के भीतर रोटेशन को देखें तो, निवेशक अब मेटल से निकलकर एनर्जी और रिटेल-हैवी स्टॉक्स में अपना पैसा लगा रहे हैं, जो रिलायंस जैसे दिग्गजों के लिए एक बड़ा सकारात्मक कैटलिस्ट है।
फंडामेंटल और वैल्यूएशन
RELIANCE के फंडामेंटल डेटा आज भी मजबूत हैं। कंपनी का वर्तमान P/E रेशियो 24.5 है, जो कि इसके पिछले 5 वर्षों के औसत (22-26 के बैंड) के बिल्कुल अनुरूप है, यह दर्शाता है कि स्टॉक न तो ओवरवैल्यूड है और न ही अंडरवैल्यूड। कंपनी का ROE (रिटर्न ऑन इक्विटी) 12.8% और ROCE (रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड) 10.5% है, जो चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल में भी परिचालन दक्षता को दर्शाता है। रिलायंस का सबसे प्रभावशाली आंकड़ा debt-to-equity रेशियो 0.35 का है, जो रिलायंस को एक ‘अत्यधिक सुरक्षित’ बैलेंस शीट वाली कंपनी बनाता है। कंपनी का तिमाही राजस्व ₹2,50,000 करोड़ के आंकड़े को छू रहा है। EPS (अर्निंग पर शेयर) में 8% की निरंतर वृद्धि यह सिद्ध करती है कि कंपनी का कोर बिजनेस कैश जनरेशन के लिए बेहतरीन है। जब हम इसकी तुलना आईटी दिग्गज TCS के P/E (32) से करते हैं, तो रिलायंस का P/B रेशियो (2.1) और अधिक फिजिकल एसेट-आधारित होना, अस्थिर बाज़ार स्थितियों में अधिक सुरक्षा प्रदान करता है। ₹1,365 पर, मार्केट कैपिटलाइजेशन और भविष्य की अर्निंग पोटेंशियल का अनुपात संतुलित है। रिलायंस का प्रति शेयर बुक वैल्यू ₹640 है। यदि हम इसके डिजिटल और रिटेल सब्सिडियरी के वैल्यूएशन को जोड़ें, तो ‘सम-ऑफ-द-पार्ट्स’ (SOTP) मूल्यांकन में रिलायंस का फेयर वैल्यू ₹1,500 के आसपास निकलकर आता है, जो मौजूदा भाव से एक आकर्षक लॉन्ग-टर्म एंट्री पॉइंट है।
हाल की प्रबंधन कार्रवाई और कैटलिस्ट

रिलायंस प्रबंधन, विशेषकर मुकेश अंबानी के नेतृत्व में, ‘न्यू एनर्जी’ और ‘डिजिटल सर्विस’ को भविष्य के इंजन के रूप में देख रहा है। हालिया घोषणा के अनुसार, अगले तीन वर्षों में ग्रीन एनर्जी सेक्टर में ₹75,000 करोड़ का बड़ा कैपेक्स आवंटन किया गया है। यह निवेश सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग और बड़े पैमाने पर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए है। इसके अलावा, रिलायंस रिटेल का विस्तार अब टियर-2 और टियर-3 शहरों में 500 से अधिक नए स्टोर्स के माध्यम से हो रहा है, जो कि इसकी ‘कैश-फ्लो मशीन’ है। जियो के डेटा आर्किटेक्चर को अपग्रेड करना और 5G विस्तार का उपयोग कर रहे उद्यम समाधान (Enterprise Solutions) रिलायंस की आय में एक बड़ा उत्प्रेरक (Catalyst) साबित हो रहे हैं। वीकली चार्ट पर ‘कप एंड हैंडल’ पैटर्न का निर्माण होना इस बात का प्रमाण है कि शेयर एक बड़े कंसोलिडेशन चरण से बाहर निकलने के लिए तैयार है। प्रबंधन ने यह स्पष्ट किया है कि कंपनी का लक्ष्य अपने शुद्ध ऋण (Net Debt) को ज़ीरो के करीब बनाए रखना है, जो कि निवेशकों के लिए एक और बड़ा सकारात्मक संकेत है। कंपनी के भीतर हो रहे ये संगठनात्मक परिवर्तन और पूंजी का कुशल आवंटन, भविष्य में शेयरहोल्डर वैल्यू को अनलॉक करने की क्षमता रखते हैं। पिछले 24 महीनों में, रिलायंस ने अपने डिजिटल ईकोसिस्टम में 200 मिलियन से अधिक नए उपयोगकर्ताओं को जोड़ा है, जो भविष्य के डेटा मोनिटाइजेशन के लिए एक मजबूत नींव प्रदान करता है।
FII/DII गतिविधि और संस्थागत निवेशकों का दृष्टिकोण
संस्थागत निवेशकों के हालिया डेटा के अनुसार, FII ने रिलायंस में अपनी होल्डिंग को 22.4% पर स्थिर रखा है। यह स्थिरता यह दर्शाती है कि विदेशी संस्थागत निवेशक भारत के सबसे बड़े मार्केट-कैप स्टॉक पर भरोसा बनाए हुए हैं, भले ही व्यापक बाज़ार में वे बिकवाली कर रहे हों। डीआईआई (DII) और घरेलू म्यूचुअल फंड्स का रिलायंस में एक्सपोजर 18.2% के आसपास है, जो प्रत्येक ₹1,300 के स्तर पर एक ‘फ्लोर’ के रूप में कार्य करता है। यह संस्थागत निवेश एक सुरक्षात्मक कवच प्रदान करता है, जो खुदरा निवेशकों के लिए रिलायंस को एक ‘सुरक्षित बंदरगाह’ बनाता है। विश्लेषक के रूप में, मैं देख रहा हूँ कि जब भी वैश्विक बाजार में अस्थिरता होती है, तो संस्थागत खिलाड़ी रिलायंस में खरीदारी बढ़ाते हैं। उनका विश्वास कंपनी के ‘असेट-लाइट’ रिटेल मॉडल और एआई-संचालित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में है। यह ‘स्मार्ट मनी’ का निवेश है जो लंबे समय में शेयर को ₹1,500 के पार ले जाने के लिए ईंधन का काम करेगा। संस्थागत होल्डिंग का यह उच्च स्तर कंपनी की कॉर्पोरेट गवर्नेंस और भविष्य की विकास क्षमता के प्रति विश्वास को प्रदर्शित करता है। इसके अतिरिक्त, रिलायंस का इंडेक्स वेटेज (निफ्टी में ~9%) इसे पैसिव फंड्स और ईटीएफ (ETF) के लिए एक अनिवार्य घटक बनाता है, जिससे हर गिरावट पर निरंतर खरीदारी का दबाव बना रहता है।
आगे की संभावनाएँ — Bull / Base / Bear परिदृश्य

Bull Scenario (तेज़ी): यदि रिलायंस ₹1,385 के रेजिस्टेंस को पार कर वॉल्यूम के साथ स्थिरता प्रदान करता है, तो अगले 6 महीनों में ₹1,550-₹1,600 का लक्ष्य प्राप्त करना स्वाभाविक है। यह परिदृश्य तब साकार होगा जब ग्लोबल क्रूड की कीमतें स्थिर रहेंगी और न्यू एनर्जी डिवीजन से राजस्व का पहला बड़ा हिस्सा घोषित होगा। साथ ही, जियो के एआरपीयू (ARPU) में 5% की और बढ़ोतरी बुलिश ट्रेंड को हवा देगी।
Base Scenario (आधार): यदि बाज़ार का मूड औसत रहता है, तो रिलायंस ₹1,320-₹1,385 के दायरे में बना रहेगा। इस रेंज में निवेशकों को धैर्य रखना चाहिए और खरीदारी का अवसर खोजना चाहिए। कंपनी का मजबूत कैश फ्लो इसे इस दायरे में नीचे जाने से रोकेगा।
Bear Scenario (मंदी): यदि कोई वैश्विक भू-राजनीतिक संकट पैदा होता है और कच्चा तेल $60/बैरल से नीचे आता है, तो ₹1,250 तक की गिरावट संभव है। हालांकि, यह स्तर एक मजबूत ‘बायिंग ज़ोन’ के रूप में कार्य करेगा क्योंकि कंपनी के मूल फंडामेंटल्स (EPS/ROE) इतने नीचे जाने के लिए इजाजत नहीं देंगे। निवेशकों के लिए ₹1,250 का स्तर पोर्टफोलियो में रिलायंस को ऐड करने का सबसे बेहतरीन मौका होगा।
भारतीय खुदरा निवेशकों के लिए रणनीति
रिलायंस जैसे ब्लू-चिप शेयर के लिए खुदरा निवेशकों को ‘समय’ के बजाय ‘मूल्य’ (Price) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मेरी सलाह है कि एकमुश्त खरीदारी के बजाय, इसे ‘SIP’ मोड में एक्यूमुलेट करें। यदि आप इसे अपने पोर्टफोलियो का 10-15% बनाना चाहते हैं, तो वर्तमान भाव (₹1,365) पर 30% निवेश करें। ₹1,320 के आसपास अगले 40% की खरीदारी करें और ₹1,400 के ब्रेकआउट के बाद ही अंतिम 30% को तैनात करें। रिलायंस धन सृजन (Wealth Creation) के लिए है, न कि इंट्राडे जुए के लिए। सुनिश्चित करें कि आपका स्टॉप-लॉस ₹1,280 के स्तर के नीचे स्थित हो। यह रणनीति आपको बाजार की अस्थिरता से बचाएगी और आपकी औसत लागत को भी नियंत्रित रखेगी। याद रखें, रिलायंस आपके पोर्टफोलियो का वह खंभा है जो बाजार की आंधियों में भी घर को मजबूती देता है। किसी भी गिरावट में घबराने के बजाय, कंपनी के लंबे समय के विजन को ध्यान में रखें—जो है, ‘न्यू एनर्जी’ और ‘डिजिटल भारत’। आपका पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन इस स्टॉक के बिना अधूरा है, क्योंकि यह भारत की आर्थिक प्रगति के हर कदम में भागीदार है। धैर्य और अनुशासन ही रिलायंस में वेल्थ क्रिएशन का मूल मंत्र है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. क्या RELIANCE अभी खरीदने के लिए सही समय है?
A. रिलायंस वर्तमान में अपने 5-वर्षीय औसत P/E पर है, जो इसे निवेश के लिए एक ‘फेयर वैल्यू’ बनाता है। लंबी अवधि के लक्ष्यों वाले निवेशक यहाँ से खरीदारी शुरू कर सकते हैं, बशर्ते उनका नजरिया 2-3 साल का हो।
Q2. रिलायंस की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
A. इसका डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो—एनर्जी से लेकर रिटेल और टेलीकॉम तक—जो इसे किसी एक सेक्टर की मंदी से बचाता है। इसका कैश फ्लो जनरेशन इसे भारतीय बाज़ार में सबसे सुरक्षित बनाता है।
Q3. क्या मुझे RELIANCE में डेली ट्रेडिंग करनी चाहिए?
A. रिलायंस में उच्च लिक्विडिटी है, लेकिन इसकी चालें अक्सर धीमी और बड़े ट्रेंड्स वाली होती हैं। यह मुख्य रूप से लॉन्ग-टर्म निवेशकों और स्विंग ट्रेडर्स के लिए उपयुक्त है, न कि दैनिक उतार-चढ़ाव वाले इंट्राडे जुए के लिए।
Q4. ओ2सी और रिटेल में से कौन सा बिजनेस भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है?
A. वर्तमान में ओ2सी (तेल और पेट्रोकेमिकल्स) कंपनी की ‘कैश-काउ’ है, लेकिन भविष्य का अधिकांश वैल्यूएशन रिटेल और डिजिटल सर्विसेज (जियो) से आ रहा है। लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए डिजिटल इकोसिस्टम ही प्रमुख ड्राइवर है।
Q5. रिलायंस का डिविडेंड यील्ड कितना है?
A. रिलायंस का डिविडेंड यील्ड लगभग 0.3%-0.5% के बीच है। कंपनी लाभ का अधिकांश हिस्सा री-इन्वेस्टमेंट के लिए रखती है, जो शेयरहोल्डर वैल्यू बढ़ाता है और भविष्य की विकास परियोजनाओं को वित्तपोषित करता है।
भारतीय बाज़ार स्नैपशॉट
नीचे प्रमुख भारतीय सूचकांक और रुपया विनिमय दर का अद्यतन स्नैपशॉट है। इन सूचकांकों की प्रवृत्ति समझे बिना किसी भी अमेरिकी या ग्लोबल विश्लेषण को भारतीय निवेशक के पोर्टफोलियो पर लागू करना अधूरा है।
स्रोत: Yahoo Finance · NSE / BSE · डेटा कैश 15 मिनट
RELIANCE के मुख्य फंडामेंटल (Screener.in)
नीचे दिए गए वित्तीय अनुपात Screener.in से लिए गए हैं — भारतीय निवेशकों के बीच सबसे भरोसेमंद फंडामेंटल विश्लेषण मंच। ये आँकड़े दीर्घकालिक (long-term) निवेश निर्णय के लिए प्रमुख संकेतक हैं।
स्रोत: Screener.in/RELIANCE · डेटा कैश 1 घंटा
आज की मुख्य बाज़ार खबरें
निवेश निर्णय लेने से पहले बाज़ार की हालिया घटनाओं को समझना अनिवार्य है। नीचे भारतीय वित्तीय मीडिया (Mint, Economic Times) से चुनी गई सबसे ताज़ा हेडलाइन्स हैं:
- Gold, silver prices today: Check retail rates of 24K, 22K gold, 999 silver on 18 April in Delhi, Mumbai, Pune, others
- ICICI Bank Q4 results 2026 preview: Expect healthy NII but flattish NIM growth; pick up in PL may drive loan growth
- Q4 results 2026: HDFC Bank, ICICI Bank, Yes Bank, six others to declare Q4 results today
- US-Iran war: How effective is Donald Trump’s blockade of the Strait of Hormuz?
- HDFC Bank Q4 results preview: Net profit may rise 9%, NII seen up 6% YoY with stable margins; dividend in focus
स्रोत: Mint · Economic Times Markets

भारतीय बाज़ार स्नैपशॉट
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स्रोत: Yahoo Finance · NSE / BSE · डेटा कैश 15 मिनट
RELIANCE के मुख्य फंडामेंटल (Screener.in)
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स्रोत: Screener.in/RELIANCE · डेटा कैश 1 घंटा
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स्रोत: Mint · Economic Times Markets
